एक और व्यक्ति से मिलना है-
फिर कुछ और से
एक इकाई बनानी है-
पहचान करनी है-
समस्याओं की-
जरूरतों की-
जीवन स्तर के उत्थान में प्रगति के उपायों की।
सबसे आसान को कर डालना है,
निदान ढूँढ़ना है- कार्यान्वित करना है
अगली जरूरत / समस्या का-
सक्रिय रखना है अन्य लोगों को भी।
उदाहरणार्थ:-
आपके मुहल्ले में समस्याएँ हैं-
गली में अंधेरा रहता है,
गली में गंदगी फैली है, नाले बहते हैं,
स्कूल में शिक्षक नहीं आते हैं,
स्वास्थ्य उपकेन्द्र पर चिकित्सक नहीं आते हैं,
एक/कुछ व्यक्ति की रंगदारी है-
अन्यान्य।
यदि लोग गली में अंधेरा दूर करने में कुछ भी सहयोग करने को तैयार नहीं है, गंदगी फैलानेवालों को नहीं रोक सकते, तो,
कुछ लोग मिलकर मंदिर की सफाई तो कर सकते हैं?
जरूरतमन्द बच्चों को पढ़ा तो सकते है?
मिलकर सांस्कृतिक कार्य कीर्तन भजन तो कर सकते है?
फिर आप गली के अंधेरे को दूर कर सकेंगे-
फिर आप नहीं आनेवाले शिक्षक और चिकित्सक को आने के
लिए विनम्र निवेदन कर सकेंगे,
और फिर उच्चतर अधिकारियों से मिलकर उनकी उपस्थिति
सुनिश्चित कर सकेंगे।
स्कूल एवं अस्पताल के भवन, गलियों का पक्कीकरण के लिए
विभिन्न उपायों द्वारा (सांसद कोटा, विधायक कोटा, विभागीय कार्य इत्यादि) कर सकेंगे।
हर कोई सब कुछ नहीं कर सकेगा-
कुछ लोग कुछ करेंगे, दूसरे दूसरा करें-
पहले रंगदारी की धार कम होगी,
फिर रंगदारी की वह ऊर्जा भी अच्छे कार्य में लग जाएगी।
-सामाजिक उत्थान में तीव्रता आएगी,
यह अनवरत प्रक्रिया है।
कुछ भी अच्छा नहीं लगा? कुछ भी करने की हिम्मत नहीं है? किसी पर भी विश्वास नहीं है?
तो आज (हर रोज) एक रुपया और वाजिब तरीके से कमाने की कोशिश अवश्य प्रारंभ कर दें।