तलाश
एक रचनात्मक सामूहिक सोच
“हम कौन थे, क्या हो गये हैं, और क्या होंगे अभी।
आओ विचारें आज मिलकर, ये समस्याएँ सभी।।”
कोष, कुर्सी, कौन! तीनों गौण!!
| क्र. सं. | तिथि | स्थान | कार्यसूची | मुख्य अतिथि |
|---|---|---|---|---|
| 1 | 2026-04-16 | |||
| 2 | 2026-04-15 | patna | galt | g |
| 3 | 2006-12-03 | डा० बिन्देश्वर |
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आप जहाँ भी हैं, जो कुछ भी अच्छा कर रहे हैं, करते चलें,
अन्य लोगों को भी अपनी सृजनात्मक ऊर्जा से उत्प्रेरित करते चलें,
‘तलाश’ तो आप के मन-प्राण में है।
वृहत् एवं त्वरित बदलाव के लिए आपका-हमारा जुड़ना आवश्यक है।
मिलें तो सही,
बातें तो हों,
हर माह के प्रथम रविवार की बैठक में शामिल हों।
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