स्वतंत्रता की लड़ाई-
दुश्मन सामने था, आकार था, पहचान थी,
सुभाष और गाँधी आए।
महाभारत की लड़ाई-
दुश्मन सामने थे, सगे भाई बांधव थे, गुरु, पितामह थे,
कृष्ण को आना पड़ा, अर्जुन को गाण्डीव उठाना पड़ा।
विकास की लड़ाई-
दुश्मन की पहचान भी मुश्किल है, आकारहीन है,
स्वार्थ, भ्रष्टाचार, निष्क्रियता, समाज से बेजारी, आलस्य।
मुश्किल है-
ये सभी दुश्मन हमारे अन्दर ही बैठे हैं,
खुद से लड़ना होगा, आपको आगे होना होगा।
गिरावट में अपनी भागीदारी कम करें-
थोड़ा और कम करें। तटस्थता दूर करें।
सक्रिय प्रयास करें।
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