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एच-3, डॉक्टर्स कॉलोनी, कंकड़बाग, पटना-20
ममता
:
पिताजी, हमारे घर के बगल में सड़क पर एक नल कई दिनों से बह रहा है।
पिता श्री
:
तो मैं क्या करूँ?
ममता
:
सड़क पर कितना कीचड़ हो गया है, लोगों को आने-जाने में कितनी असुविधा होती है, पीने योग्य पानी की बर्बादी अलग।
पिता श्री
:
जिनको नल ठीक करने की जिम्मेदारी है, वे नहीं देखते, जिन्हें असुविधा होती है वे नहीं बोलते, तो मैं इसमें क्या कर सकता हूँ?
ममता
:
असुविधा तो हमें भी हो रही है, आप इतने बड़े पदाधिकारी हैं, आप क्यों नहीं सम्बन्धित विभाग को कुछ कहते हैं?
पिता श्री
:
मैं ही सर दर्द क्यों लूँ?
ममता
:
यदि आप (जो समर्थ हैं) नहीं लेंगे (जिम्मेदारी) तो दूसरा (जो गुजर जाता है) कैसे कुछ कर सकेगा?
पिता श्री
:
अच्छा बाबा देखता हूँ।

नल का बेकार बहना बन्द हो गया।

ममता ने 'तलाश' की अग्रणी भूमिका निभाई, ममता के पिता श्री ने 'तलाश' का कार्य किया, 'तलाश' के कुछ करने से बहुत पूर्व से लोग कर रहे हैं। परन्तु बहुत थोड़े। ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस दिशा में सक्रिय होने की आवश्यकता है। ममता के सदृश्य 'पहरुओं' की हमें बहुत जरूरत है।

'तलाश' परिवार की ओर से ममता जहाँ भी हों (जहाँ-जहाँ भी हों) हमारी शुभ-कामनाएँ! एवं आकांक्षाएँ कि वे 'तलाश' की मशाल हमेशा जलाए रखेंगी।

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